अन्नमय्य कीर्तन जो अच्युतानंद


रागं: कापि
आ: स रि2 म1 प नि3 स
अव: स नि2 द2 नि2 प म1 ग2 रि2 स
तालं: आदि

पल्लवि
(रागं: केदार)
जो अच्युतानंद जोजो मुकुंदा
रावॆ परमानंद राम गोविंदा ॥ (2.5)
जो जो (2)

चरणं 1
अंगजुनि गन्न मा यन्न यिटु रारा
बंगारु गिन्नॆलो पालु पोसेरा । (2)
दॊंग नीवनि सतुलु गॊंकुचुन्नारा
मुंगिट नाडरा मोहनाकार ॥ (1)
जो जो ॥ (2)

चरणं 2
(रागं: सुरटि)
आ: स ग3 रि2 ग3 म1 प द2 नि2 द2 प स
अव: स नि3 द2 प म1 ग3 रि2 स

गोवर्धनंबॆल्ल गॊडुगुगा पट्टि
कावरम्मुन नुन्न कंसुपडगॊट्टि ।
नीवु मधुरापुरमु नेलचेपट्टि
ठीवितो नेलिन देवकीपट्टि ॥

चरणं 3
नंदु निंटनु जेरि नयमु मीऱंग
चंद्रवदनलु नीकु सेव चेयंग ।
नंदमुग वारिंड्ल नाडुचुंडंग
मंदलकु दॊंग मा मुद्दुरंग ॥

चरणं 4
(रागं: बिलहरि)
आ: स रि2 ग3 प द2 स
अव: स नि3 द2 प म1 ग3 रि2 स

पालवाराशिलो पवलिंचिनावु
बालुगा मुनुल कभयमिच्चिनावु ।
मेलुगा वसुदेवु कुदयिंचिनावु
बालुडै युंडि गोपालुडैनावु ॥

चरणं 5
(रागं: धन्यासि)
आ: स ग2 म1 प नि2 स
अव: स नि2 द1 प म1 ग2 रि1 स

अट्टुगट्टिन मीग डट्टॆ तिन्नाडे
पट्टि कोडलु मूतिपै रासिनाडे ।
अट्टॆ तिनॆननि यत्त यडग विन्नाडे
गट्टिगा निदि दॊंग कॊट्टुमन्नाडे ॥

चरणं 6
(रागं: शन्कराभरण)
आ: स रि2 ग3 म1 प द2 नि3 स
अव: स नि3 द2 प म1 ग3 रि2 स

गॊल्लवारिंड्लकु गॊब्बुनकुबोयि
कॊल्ललुगा त्रावि कुंडलनु नेयि ।
चॆल्लुना मगनांड्र जॆलिगि यीशायी
चिल्लतनमुलु सेय जॆल्लुनटवोयि ॥

चरणं 7
(रागं: खरहरप्रिया)
आ: स रि2 ग2 म1 प द2 नि2 स
अव: स नि2 द2 प म1 ग2 रि2 स

रेपल्लॆ सतुलॆल्ल गोपंबुतोनु
गोपम्म मी कॊडुकु मा यिंड्ल लोनु ।
मापुगाने वच्चि मा मानमुलनु
नी पापडे चॆऱिचॆ नेमंदुमम्म ॥

चरणं 8
(रागं: कांभोजि)
आ: स रि2 ग3 म1 प द2 स
अव: स नि2 द2 प म1 ग3 रि2 स नि3 प द2 स

ऒकनि यालिनिदॆच्चि नॊकनि कडबॆट्टि
जगडमुलु कलिपिंचि सतिपतुलबट्टि ।
पगलु नलुजामुलुनु बालुडै नट्टि
मगनांड्र चेपट्टि मदनुडै नट्टि ॥

चरणं 9
अलिगि तृणावर्तु नवनि गूल्चितिवि
बलिमिमै बूतन बट्टि पील्चितिवि ।
चॆलगि शकटासुरुनि जेरि डॊल्चितिवि
तलचि मद्दुलु रॆंडु धरणि व्राल्चितिवि ॥

चरणं 10
(रागं: सुरटि)
आ: स रि2 म1 प नि2 स
अव: स नि2 द2 प म1 ग3 प म1 रि2 स

हंगुगा ताल्लपाकन्नय्य चाल
शृंगार रचनगा चॆप्पॆ नी जोल । (2)
संगतिग सकल संपदल नीवेल
मंगलमु तिरुपट्ल मदनगोपाल ॥ (1)
जो अच्युतानंद जोजो मुकुंदा
रावॆ परमानंद राम गोविंदा ॥ (प.) (2.5)
जो जो ॥ (4)

सारके विचारिल्ले प्रस्न

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